Qutub Minar History in Hindi its Monuments, Delhi

  • Post last modified:August 3, 2025

कुतुब मीनार का इतिहास कुतुब मीनार और उसके स्मारक

कुतुब मीनार भारत में दक्षिण दिल्ली शहर के महरौली भाग में स्थित ईंट से बनी विश्व की सबसे ऊंची मीनार है यह दिल्ली का एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है इसकी ऊंचाई 73 मी 239.5 फिट और व्यास 14.3 मीटर है जो ऊपर जाकर शिखर पर 2.75 मीटर हो जाता है इसमें 379 सीढ़ियां है मीनार के चारों ओर बने आहते में भारतीय कला के कई उत्कृष्ट नमूने हैं जिनमें से अनेक इसके निर्माण कल सन 1192 के हैं यहां परिसर यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में स्वीकृत किया गया है कहा जाता है कि यह मीनार पास के 27 किला को तोड़कर और दिल्ली विजय के उपलक्ष में किला के मलबे से बनाई गई थी इसका प्रमाण मीनार के अंदर कुतुब के चित्र से मिलता है एक स्थान के अनुसार यह मीनार विरह मीर का खगोल शास्त्र वेधशाला थी कुतुब मीनार परिसर में एक कुतुब स्तंभ भी है जिस पर जंग नहीं लगती है।

कुतुब मीनार इतिहास

अफगानिस्तान में स्थित जाम की मीनार से प्रेरित एवं उससे आगे निकलने की इच्छा से दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक को तो वह दीन ऐबक ने सन 1193 में आरंभ करवाया परंतु इसका आधार ही बनवा पाया उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने इसमें तीन मंजिलों को बढ़ाया और सन 1368 मैं फिरोज शाह तुगलक ने पांचवी और अंतिम मंजिल बनवा मीनार को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है जिस पर कुरान की आयतों की एक फूल बैलों की महीना काशी की गई है। कुतुब मीनार का निर्माण ढल्लीका के गढ़ लाल कोर्ट के खंडहरों पर किया गया था कुतुब मीनार लाल और बफ सेंट स्टोन से बनी भारत की सबसे ऊंची मीनार है।
13वीं शताब्दी में निर्मित यहां भव्य मीनार राजधानी दिल्ली में खड़ी है इसका व्यास आधार पर 14.32 मीटर और 72.5 मी की ऊंचाई पर शीर्ष के पास लगभग 2.75 मीटर है। इस संकुल में अन्य महत्वपूर्ण स्मारक है जैसे की 1310 में निर्मित एक द्वारा अलाई दरवाजा, कुवैत उल इस्लाम मस्जिद,इल्तुतमिश ,अलाउद्दीन खिलजी तथा इमाम जमीन के मकबरे, अलाई मीनार 7 मीटर ऊंचा लोहे का स्तंभ आदि।
गुलाम राजवंश की कुतुबुद्दीन ऐबक ने एड 1199 में मीनार की नींव रखी थी और यह नमाज अदा करने की पुकार लगाने के लिए बनाई गई थी तथा इसकी पहली मंजिल बनाईं गई थी जिसके बाद इसके उतराव्रत तथा दामाद शमसुद्दीन इल्तुतमिश ने तीन और मंजिली इस पर जोड़ी इसकी सभी मंजिलों के चारों ओर आगे बड़े हुए छज्जे हैं जो मीनार को गिरते हैं तथा इन्हें पत्थर के ब्रैकेट से शहर दिया गया है जिन पर मधुमक्खियां के छते के समान सजावट है और यह सजावट पहली मंजिल पर अधिक स्पष्ट है।
कुवत उल इस्लाम मस्जिद मीनार के उत्तर पूर्व में स्थित है जिसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने एड 1198 के दौरान कराया था यह दिल्ली के सुल्तानों द्वारा निर्मित सबसे पुरानी मस्जिद है इसमें नक्काशी वाले खंबो पर उठे जाकर से गिरा हुआ एक आयत कर आंगन है यह कार्य शमशुद्दीन इल्तुतमिश द्वारा और अलाउद्दीन खिलजी द्वारा किया गया था। इल्तुतमिश का मकबरा एड 1235 में बनाया गया था यहां लाल सेंडस्टोन का बना हुआ सदा चौकोर कक्षा है जिसमें ढेर सारे शिलालेख ज्यामिति आकृतियां और अरबी पर इसमें से कुछ नमूने इस प्रकार हैं पहिए आदि।

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